MKmradul katiyar
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// 05 . WRITINGPUBLISHED: March, 31, 2026

एक दिन जब मैं किताब लिखूंगा

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एक दिन जब मैं किताब लिखूंगा

एक दिन जब मैं किताब लिखूंगा,

तुझको मैं सूरज, खुद को महताब लिखूंगा,

लिखूंगा तुझको उजाला सुबह का,

खुद को मैं ठहरी हुई एक शाम लिखूंगा।

तुझे लिखूंगा मुकम्मल हक़ीक़त,

खुद को अधूरा ख्वाब लिखूंगा,

लिखूंगा तुझे मैं दास्तान प्यार की,

खुद को मैं एक अंजाम लिखूंगा।

तू हर सफ़े पे चमकती रहेगी,

मैं खुद को धुंधला सा इक नाम लिखूंगा,

तू मिल जाएगी दुआ में किसी की,

मैं खुद को बस इंतज़ार लिखूंगा।

तू रहेगी मुकम्मल हर किस्से में,

मैं खुद को बिखरा अरमान लिखूंगा,

तू जी लेगी हर ख़ुशी इस जहाँ में,

मैं खुद को बस एहसास लिखूंगा।

और आख़िर में बस—

लिखूंगा तुझे मैं आग़ाज़ हसीं,

खुद में मैं बस विराम लिखूंगा।

ARTICLE: एक दिन जब मैं किताब लिखूंगा

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