MKmradul katiyar
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// 05 . WRITINGPUBLISHED: March, 30, 2026

मुझे बस तुम्हारे चार पल दे दो

shayarihindisademotional
LEAVING ALONE

मुझे बस तुम्हारे चार पल दे दो,

एक पल साल का, एक पल महीने का,

एक पल हफ्ते का, एक पल दिन का।

मुझे बस तुम्हारे चार पल दे दो,

एक पल गर्मी का, एक पल सर्दी का,

एक पल वसंत का, एक पल पतझड़ का।

मुझे बस तुम्हारे चार पल दे दो,

एक पल सुबह का, एक पल दोपहर का,

एक पल शाम का, एक पल रात का।

मुझे बस तुम्हारे चार पल दे दो,

एक पल हँसी का, एक पल उदासी का,

एक पल बातों का, एक पल ख़ामोशी का।

मुझे बस तुम्हारे चार पल दे दो,

एक पल ख़्वाबों का, एक पल हक़ीक़त का,

एक पल मिलने का, एक पल बिछड़ने का।

मुझे बस तुम्हारे चार पल दे दो,

एक पल उम्मीद का, एक पल इंतज़ार का,

एक पल सुकून का, एक पल करार का।

मुझे बस तुम्हारे चार पल दे दो,

एक पल आँखों का, एक पल आँसुओं का,

एक पल धड़कनों का, एक पल सन्नाटों का।

मुझे बस तुम्हारे चार पल दे दो,

एक पल यादों का, एक पल भूलने का,

एक पल पास आने का, एक पल दूर होने का।

और अगर हो सके…

तो एक पल ऐसा भी दे देना

जिसमें कोई मौसम न हो,

कोई घड़ी न बजे,

कोई दिन न ढले।

बस तुम हो…

और मैं।

क्योंकि सच कहूँ —

शायद उन्हीं चार पलों में

मैं पूरी ज़िंदगी जी लूँगा,

और फिर तन्हाई से

बाक़ी उम्र का समझौता कर लूँगा।

ARTICLE: मुझे बस तुम्हारे चार पल दे दो

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