MKmradul katiyar
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// 05 . WRITINGPUBLISHED: Aug, 11, 2026

नज़रें मिलाऊँ तो डर लगता है

gazalsadromantic
नज़रें मिलाऊँ तो डर लगता है

नज़रें मिलाऊँ तो डर लगता है,
तुझे इस तरह देखना भी कहर लगता है।

बचाते रहे उम्र भर जो दिल को अपने,
उसी दिल पे अब तेरा असर लगता है।

अकेले ही तय करना था हमको ये रस्ता,
मगर साथ तू हो तो नया सफ़र लगता है।

वो चेहरा जो बरसों से था अजनबी सा,
उसी शख्स में अब तो अपना घर लगता है।

तमाशा ये दुनिया का आँखों के आगे,
हर एक मोड़ पर दिल भंवर लगता है।

चलो मान लेते हैं हारे हैं दिल से,
ये हारना भी हमें अब हुनर लगता है।

ARTICLE: नज़रें मिलाऊँ तो डर लगता है

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